खेती का तरीका – खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार वे अवांछनीय पौधे होते हैं, जो बिना उगाए खेत में उग जाते हैं तथा मुख्य फसल के साथ स्थान, नमी, पोषक तत्व तथा प्रकाश आदि को लेकर प्रतिस्पर्धा करते हैं|

 

 

 

 

     1. बगीचे में खरपतवार कैसे प्रवेश करते हैं ?

  • मानव ,पक्षी तथा हवा के द्वारा |
  • बगीचे में मिट्टी समतलीकरण के दौरान मिट्टी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर |
  • कार्बनिक तत्वों एवं गोबर की खाद उपयोग करने पर |
  • ऑर्गेनिक मल्चिंग के रूप में खरपतवार उपयोग करने पर|
  1. खरपतवार मुख्य फसल को कैसे प्रभावित करते है?
  • खरपतवार मुख्य फसल के साथ पोषक तत्व, प्रकाश, स्थान, नमी आदि को लेकर प्रतिस्पर्धा करते हैं जिससे मुख्य फसल की वृद्धि तथा उत्पादन में कमी आती है|
  • खरपतवार अनेक प्रकार के कीट तथा बीमारियों को आश्रय देते हैं जिससे मुख्य फसल को हानि होती है|
  • बगीचे में खरपतवार, जल ,फर्टिलाइजर , कीट तथा बीमारियों के प्रबंधन में बाधा पहुंचते है|

 खरपतवारो का वर्गीकरण किस प्रकार होता है ?

एकवर्षीय खरपतवार – ऐसे खरपतवार जो अपना जीवन चक्र एक वर्ष में पूरा कर लेते हैं, एक वर्षीय खरपतवार कहलाते हैं| इनका प्रवर्धन मुख्यत; बीजों द्वारा होता है, जैसे पोर्तुलाका, जंगली चौलाई, बथुआ आदि 

 

 

 

 

द्विवर्षीय खरपतवार ऐसे खरपतवार जो प्रथम वर्ष में वानस्पतिक वृद्धि करते हैं तथा द्वितीय वर्ष में प्रजनक वृद्धि करते हैं, द्विवर्षीय खरपतवार कहलाते है जैसे जंगली गाजर, जंगली प्याज, जंगली गोभी, बनयार्ड घास

 

 

 

 

बहुवर्षीय खरपतवारऐसे खरपतवार जो 2 वर्ष से अधिक वर्ष तक जीवित रहते हैं, बहुवर्षीय खरपतवार कहलाते हैं, यह विपरीत वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं| जैसे मोथा, जरायन, हिरनखुरी, गाजरघास

 

 

 

 

 

बगीचे में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें ?

  • खरपतवार के स्त्रोतों को नियंत्रित करके | (प्रश्नोत्तरी क्रमांक 1)
  • खरपतवार में पुष्पन से पहले ही खरपतवार को नष्ट कर देना,जिससे कि अगली पीढ़ी में खरपतवार नहीं आये |
  • अच्छी प्रकार से सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए ,क्योंकि अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद में खरपतवार के बीज बहुत ही कम होते हैं|
  • गर्मियों के मौसम में गहरी जुताई करना जिससे कि खरपतवार के बीज गर्म मौसम में नष्ट हो जाए|
  • बगीचे में दूसरे स्थान से लाई गई मृदा का मृदा सौरीकरण (सोलराइज़ेशन ) करने के पश्चात ही बगीचे में उपयोग करें|
  • ऑर्गेनिक मल्चिंग के रूप में उपयोग करने वाले खरपतवार की जांच कर ले तथा यह सुनिश्चित करें कि खरपतवार बीज मुक्त हो एवं पूर्णत :सूख गये हो
  1. हाथो के द्वारा – पौधा लगाने के प्रारंभिक दिनों अथवा पौधा लगाने से 2 वर्ष तक खरपतवारो को हाथो से निकलना फायदेमंद होता है, छोटी खुरपी का उपयोग भी खरपतवार नियंत्रण के लिए कर सकते है ,यह छोटे बगीचे में बहुत फायदेमंद विधि है,इस विधि को सावधानी पूर्वक उपयोग करे जिससे जड़ो को क्षति न पहुँचे|

 

 

 

 

 

 

 

2. मल्चिंग – मृदा की ऊपरी सतह को किसी सुरक्षात्मक आवरण से ढकना मल्चिंग कहलाता है ,मल्चिंग मृदा की नमी को बनाए रखने में सहायक होती है तथा खरपतवार वृद्धि को रोकती है |

बगीचे में खरपतवार वृद्धि को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रयोग लाभकारी होता है

 

 

 

 

3. आवरण फसल या कवर क्रॉप – इस विधि के द्वारा खरपतवार की वृद्धि तथा मृदा के अपरदन को रोका जा सकता है, और मृदा स्वास्थ्य में सुधार आता है आवरण फसल या कवर क्रॉप के रूप में लगाई जाने वाली फसलें मुख्य फसल के साथ पोषक तत्वों की आवश्यकता, बीमारियों तथा कीट नियंत्रण के लिए अनुकूल हो कवर क्रॉप या आवरण फसल मुख्य फसल की कतारों के बीच लगाई जाती है, इसका एक अन्य फायदा है कि यह बगीचे में माइक्रोक्लाइमेट बनाने में फायदेमंद है|

 

 

 

 

 

 

 

4 . रासायनिक नियंत्रण – ऐसे रसायन जो खरपतवार का उन्मूलन एवं  रोकथाम करते है अथवा  वृद्धि को रोकते हैं खरपतवारनाशी कहलाते हैं , रसायन मानव और वातावरण दोनों के लिए हानिकारक है इसलिए   इसके उपयोग से बचना चाहिए अथवा बहुत कम उपयोग करना चाहिए| इसका सावधानी पूर्वक उपयोग न करने से फल के पौधे को भी हानि होती है और विशिष्ट स्थिति में पौधे मर जाते है|

खरपतवारनाशी का वर्गीकरण   

1.छिड़काव के स्थान के आधार पर

मृदा पर छिड़काव – इस प्रकार के खरपतवारनाशी  का प्रयोग मृदा में करते हैं ,खरपतवार नाशी जड़ों के माध्यम से खरपतवार में प्रवेश करते हैं उदाहरण -फ्लोरक्लोरेलिन

पत्तियों पर छिड़काव- इस प्रकार के खरपतवारनाशी का पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है जैसे ग्लाइफोसेट ,पैराक्वाट

2. चयनात्मकता के आधार पर

चयनात्मक खरपतवारनाशी इस प्रकार के खरपतवारनाशी चयनित प्रकार के खरपतवार की जाति को मारते है अचयनात्मक खरपतवारनाशी इस प्रकार के खरपतवार नाशी सभी प्रकार के खरपतवार को नष्ट कर देते हैं उदाहरण के लिए पैराक्वाट

  1. छिड़काव के समय के आधार पर

अंकुरण से पहले – खरपतवार के उगने से पहले खरपतवारनाशी का छिड़काव करते हैं उदाहरण के लिए पेंडामैथिलीन

अंकुरण के बाद -खरपतवार  के उगने के बाद इस प्रकार के खरपतवारनाशी का उपयोग किया जाता है उदाहरण  पैराक्वेट

  1. कार्य विधि या स्थानांतरण के आधार पर

संपर्क खरपतवारनाशी  इस प्रकार के खरपतवारनाशी संपूर्ण खरपतवारो को नष्ट कर देते हैं जो भी खरपतवारनाशी के संपर्क में आते हैं उदाहरण पैराक्वाट 2 से 5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर (सामान्य से अधिक मात्रा में खरपतवार होने पर)

कम उम्र के बगीचे में इस प्रकार के खरपतवारनाशी का उपयोग करने से बचना चाहिए पौधे के आसपास के खरपतवार को हाथ से निकाले

 स्थानांतरित खरपतवारनाशी -इस प्रकार के खरपतवारनाशी खरपतवार में जाइलम और फ्लोएम के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तथा खरपतवार के संपूर्ण शरीर में फ़ैल खरपतवार को नष्ट करते हैं जैसे ग्लाइफोसेट

ग्लाइफोसेट का उपयोग किसी भी फल के बगीचे में ना करे  |

 फल के बगीचे में खरपतवारनाशी के छिड़काव के लिए याद रखने योग्य बातें

  • ग्लाइफोसेट का उपयोग बगीचों में ना करें क्योंकि मूलवृन्त के सकर्स रसायन को ग्रहण कर लेते हैं जिससे मुख्य फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है |
  • ग्लाइफोसेट का उपयोग मानसून के मौसम में नहीं करना चाहिए क्योंकि बरसात के दिनों में वी एन आर बीही के पौधे की भोजन बनाने वाली जड़े नमी की तलाश में मृदा की ऊपरी सतह पर आने की कोशिश करती है जिससे पौधे पर खरपतवारनाशी का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है|
  • एक अध्ययन में देखा गया है कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ग्लाइफोसेट + मेट्रिब्यूज़ीन का उपयोग मानसून के मौसम में करने से 2 वर्ष पुराने अमरूद के बगीचे के संपूर्ण पौधे मर गए थे
  • ग्लाइफोसेट का उपयोग किसी भी फल के बगीचे में ना करे |

 खरपतवारनाशक के उपयोग से पहले याद रखने योग्य बातें

  • नेपसेक पंप ,नली,स्प्रेयर ,नोजल को उपयोग से पहले एवं बाद में अच्छी तरह धो कर साफ़ करे |
  • शरीर को अच्छी तरह ढक कर एवं दस्ताने ,चश्मा,आदि का उपयोग अवश्य करे |
  • खरपतवारनाशी के एक समान छिड़काव के लिए फ्लेट फेन या फ्लाइट जेट नोजल का उपयोग करें |
  • खरपतवारनाशी की निर्धारित मात्रा का ही उपयोग करें |
  • हमेशा साफ पानी में खरपतवारनाशी मिलाकर छिड़काव करें |
  • शांत मौसम में ही खरपतवारनाशी का उपयोग करें हवा वाले दिन में छिड़काव ना करें |
  • बगीचे में हमेशा हाथों से निराई का कार्य करें अथवा मल्चिंग का उपयोग करे |
  • खरपतवारनाशी में फफूंदनाशी या कीटनाशी मिला कर स्प्रे न करे |

खरपतवारनाशी के छिड़काव के लिए आवश्यक सामग्री

  • नेपसेक पंप
  • फ्लेट फेन नोजल
  • नोज़ल कैप
  • चश्मा

 

 

 

अस्वीकार्य

कभी भी दो प्रकार के खरपतवारनाशी को मिलाकर स्प्रे नहीं करना चाहिए|

खरपतवार से सम्बंधित जानकारी को आप तक पहुँचने का  प्रयास किया गया है, हम किसी ब्रांड का प्रचार नहीं कर रहे है, रसायन की गुणवत्ता एवं उसका प्रभाव उत्पादनकर्ता की जिम्मेदारी है अधिक जानकारी के लिए एवं परामर्श के लिए क्षेत्रीय कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय, उद्यानिकी विभाग, भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान रिसर्च स्टेशन से संपर्क करे|   

मल्चिंग की बगीचे में क्या भूमिका है ?

मल्चिंग के माध्यम से बगीचे में खरपतवार की वृद्धि को रोका जा सकता है

 बगीचे में मल्चिंग करने के फायदे

  • मल्चिंग खरपतवार रोकने में सहायक है तथा फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड की बचत करती है|
  • मल्चिंग मृदा नमी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि मल्चिंग मृदा वाष्पीकरण को कम कर देती है|
  • मल्चिंग मृदा तापमान को अनुकूल बनाती है|
  • मृदा संरचना को बनाए रखती है|
  • कार्बनिक मल्चिंग मृदा में कार्बनिक पदार्थों को बढ़ाती है जिससे मृदा के स्वास्थ्य में वृद्धि होती है|
  • फसल के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक है|
  • मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण के लिए होने वाले खर्चे को कम किया जा सकता है|
  • मल्चिंग पौधे की अच्छी वृद्धि में भी सहायक है|

मल्चिंग कितने प्रकार की होती है ?

मल्चिंग दो प्रकार की होती है

  1. कार्बनिक मल्चिंग या ऑर्गेनिक मल्चिंग
  2. अकार्बनिक मल्चिंग या प्लास्टिक मल्चिंग

कार्बनिक मल्चिंग या ऑर्गेनिक मल्चिंग क्या है?

जब मल्चिंग के लिए कंपोस्ट, गोबर खाद, मक्के आदि फसल के डंठल, सूखी घास, भूसा, सूखी पत्तियां, धान की पुआल और दूसरी फसल अवशेष आदि आर्गेनिक वस्तुओ का उपयोग किया जाता है तो इसे ऑर्गेनिक मल्चिंग कहते हैं|

जब यह पदार्थ उपयोग करते हैं तो इसकी मदद से बगीचे की मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा भी बढ़ा सकते हैं, परंतु कार्बनिक या ऑर्गेनिक मल्चिंग करते समय यह ध्यान दे की मल्चिंग के लिए उपयोग किए गए पदार्थ या अवशेषों में खरपतवार के बीज ना हो क्योंकि खरपतवार अनेक प्रकार के फफूंद या कीड़ों को आश्रय देते हैं|

 

 

 

 

याद रखने योग्य बातें

  • हरे या अधिक सड़े गले फसल अवशेषों का उपयोग मल्च के रूप में बगीचे में ना करें क्योंकि यह बीमारियों और कीटों का माध्यम बन सकते हैं|

मल्चिंग को मुख्य तने के पास ढेर ना लगाएं, मुख्य तने से 3 से 4 इंच की परिधि में स्थान खाली रखें जिससे पौधे के तने में कॉलर रॉट नामक बीमारी न लगे

 

 

 

 

 

 

 

अकार्बनिक या प्लास्टिक मल्चिंग क्या है ?

मृदा को प्लास्टिक शीट से ढकना प्लास्टिक मल्चिंग कहलाता है| प्लास्टिक मल्चिंग काले सफेद/ सिल्वर रंग की होती है,  प्लास्टिक शीट आसानी से कार्य योग्य होती है,  प्लास्टिक मल्चिंग मृदा में कार्बनिक पदार्थ, मृदा संरचना में सुधार नहीं करती है परंतु खरपतवार रोकने व मृदा में नमी बनाए रखने में कारगर होती है|

 

 

 

 

 

 

 

मल्चिंग के द्वारा कितना क्षेत्र ढकना है तथा इसकी मोटाई कितनी होनी चाहिए ?

मुख्य रूप से मल्चिंग पौधे की कैनोपी के लंब रूप, मांदा या बेड के आकार में होनी चाहिए, ऑर्गेनिक मल्चिंग की मोटाई लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए बैमोसम की बारिश अथवा वर्षा ऋतू से मल्चिंग सड़ कर 8 – 12 सेंटीमीटर की रह जाती है

प्लास्टिक  मल्चिंग की मोटाई 30 – 100 माइक्रोन होनी चाहिए मल्चिंग द्वारा बेड को पूरी तरह ढकना चाहिए| 100 माइक्रोन या इससे अधिक मोटी मल्चिंग कई वर्ष तक बदलनी नहीं पड़ती है, जिससे बचत होती है| 

मल्चिंग कब करना चाहिए ?

मल्चिंग के हमने जो फायदे बताए हैं जैसे मृदा नमी को बनाए रखना, मृदा तापमान को संतुलित रखना और खरपतवार की समस्या को रोकना है परंतु मौसम अनुसार मल्चिंग करके हम इसके फायदे को और बढ़ा सकते हैं|

1. कार्बनिक या ऑर्गेनिक मल्चिंग हम गर्मियों के मौसम की शुरुआत (फरवरी -मार्च ) में करते हैं उस समय सिंचाई जल की कमी रहती है और वाष्पोत्सर्जन के  कारण पौधों को कम नमी उपलब्ध होती है मल्चिंग के द्वारा हम मृदा में नमी की उपलब्धता को बढ़ा सकते हैं , गर्मी के मौसम के बाद बारिश का मौसम आता है जिससे कार्बनिक मल्चिंग सड़ जाती है और मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा में वृद्धि होती है|

2. प्लास्टिक मल्च के अलग अलग फायदे है , जैसे यदि पौध रोपण गर्मियों/ मानसून के मौसम में करते हैं तो मल्चिंग शीट का सफेद रंग ऊपर तथा काला रंग नीचे रहना लाभप्रद है,जबकि  ठंडी अथवा सर्दी के मौसम में मल्चिंग करते हैं तो  सिल्वर रंग ऊपर तथा काला रंग नीचे रहना लाभप्रद है|

ध्यान देने योग्य बाते

  • मल्चिंग शीट यदि समयानुसार खराब / फट जाती है तो यह खरपतवार वृद्धि को बढ़ावा देगी इसलिए नई मल्चिंग सीट का उपयोग करें|
  • ड्रिप लेटरल को हमेशा मल्चिंग शीट के नीचे निर्धारित स्थान पर रखे|
  • मल्चिंग शीट लगाते समय मल्चिंग शीट को मिट्टी में अच्छी तरह दबाए ताकि तेज हवा से मल्चिंग शीट को क्षति न पहुंचे|

प्लास्टिक मल्चिंग को खेत में लगाने की क्रिया विधि